हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार , हज़रत आयतुल्लाह जवादी आमोली ने इमाम ज़ैनुल आबिदीन अलैहिस्सलाम की एक रिवायत का हवाला देते हुए मुअल्लिम (शिक्षक) के मकाम के बारे में कहा:
तुम्हारे उस्ताद (शिक्षक) का तुम पर यह हक़ है कि,उसकी ताज़ीम (सम्मान) करो,
उसकी मजलिस (दरस की मजलिस) का एहतिराम करो
उसे अच्छी तरह से सुनो
उसकी तरफ मुतवज्जह रहो (क्लास में उसके रूबरू बैठो)
उस पर अपनी आवाज़ बुलंद न करो
जब कोई उससे सवाल पूछे तो उसका जवाब खुद देने से पहले तुम जवाब न दो
उसकी मजलिस में किसी से बातचीत न करो
उसकी मौजूदगी में किसी की गीबत न करो
अगर तुम्हारे सामने उसके बारे में बुराई ज़िक्र की जाए तो उसे रोको,उसके ऐबों को छुपाओ
उसकी खूबियों को ज़ाहिर करो,उसके दुश्मन के साथ न बैठो,और उसके दोस्त से दुश्मनी न करो।
इन अधिकारों की रिआयत का बदला यह है कि अल्लाह तआला के फ़रिश्ते तुम्हारे हक में गवाही देंगे कि तुम लोगों के लिए नहीं, बल्कि खुदा के लिए उसके पास गए और उसका इल्म (ज्ञान) सीखा।
(रिवायत का अरबी मतन):
حَقُّ سائسِکَ بِالعِلمِ : التَّعظیمُ لَهُ ، و التَّوقیرُ لِمَجلِسِهِ ، و حُسنُ الاستِماعِ إلَیهِ ، و الإقبالُ عَلَیهِ ، و أن لا تَرفَعَ عَلَیهِ صَوتَکَ ، و لا تُجیبَ أحَدا یَسألُهُ عَن شَیءٍ حَتّی یَکونَ هُوَ الّذی یُجیبُ ، و لا تُحَدِّثَ فی مَجلسِهِ أحَدا ، و لا تَغتابَ عِندَهُ أحَدا ، و أن تَدفَعَ عَنهُ إذا ذُکِرَ عِندَکَ بِسُوءٍ ، و أن تَستُرَ عُیوبَهُ ، و تُظهِرَ مَناقِبَهُ ، و لا تُجالِسَ لَهُ عَدُوّا ، و لا تُعادِیَ لَهُ وَلِیّا ، فإذا فَعَلتَ ذلکَ شَهِدَ لَکَ مَلائکَةُ اللّه بِأنَّکَ قَصَدتَهُ و تَعَلَّمتَ عِلْمَهُ للّه جَلَّ اسمُهُ لا لِلنّاسِ.
हवाला: अल-फकीह, जिल्द 2, सफा 620 / मफातीहुल हयात, सफा .
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